बात पुरानी है पर मन को छूने वाली…

बात पुरानी है पर मन को छूने वाली…

पवन शर्मा (अग्निबाण नीमच)

एक दिन सुबह सवेरे तरुण भाई अपनी गाड़ी लेकर हमारे ऑफिस पहुंचे और प्रेस क्लब अध्यक्ष भूपेंद्र गौड़ (बाबा) और मुझे लेने हमारे ऑफिस पहुंचे। उत्सुकतावश हमने कारण जानना चाहा कि आखिर जाना कहाँ है उन्होंने बताया पहले गाड़ी में बैठो सब बताता हूँ, अभी हमे कहीं जाना है। हम दोनों और श्री बाहेती कार में बैठ मंदसौर कि ओर निकल गए। जब हमने उनसे रास्ते मे फिर से जानना चाहा कि आखिर क्या हुआ कि अचानक इस तरह से कहाँ जाना पड़ रहा है? हुआ क्या है? उन्होंने बताया कि आपको याद होगा कुछ सालों पूर्व चौकन्ना बालाजी मंदिर के आगे बड़ी पुलिया के यहाँ एक एक्सीडेंट में चार बच्चों के माता पिता की मौत हो गई थी, और उसमें वो बच्चें अनाथ हो गए थे। हमने कहाँ हाँ हाँ याद है। उन्होंने बताया कि आज उन बच्चों के प्लाट की रजिस्ट्री करवानी है, उनको मुआवजे में जो पैसा मिला था उससे प्लाट तो खरीद लिया था लेकिन उनके पास रजिस्ट्री के पैसे नही थे तो वो ही लेकर चल रहे है आज रजिस्ट्री करवानी है।
ये बात करते करते हम सीतामऊ पहुंच गए थे। गंतव्य पर पहुंचते ही जैसे ही गाड़ी से उतरे पास ही खेल रहे दो बच्चे दौड़ते हुए आए और भैया भैया कहते हुए तरुण भाई से लिपट गए। ये देख आंखे भर आई। किसी से ऐसा संबंध जो बिना स्वार्थ के वो दुनिया भर के दिखावों से दूर था।
जब वहां पर तरुण भाई ने उन बच्चों से मिलवाया तो उन बच्चों ने बताया कि भईया हमसे हर थोड़े दिन में मिलने आते है। हमारी पूरी पढ़ाई और कपड़े लत्तों की ही नही हमारी हर जरूरतों को पूरा किया है। ये सुनकर तरुण भाई की इज्जत मेरी नजरों में और बढ़ गई थी। फिर उन बच्चों में से सबसे बड़े भाई से संवाद हुआ तो उसने बताया कि मुआवजे के पैसे से एक रुपया भी भैय्या ने खर्च नही करने दिया, हमारी हर जरूरत को उन्होंने अपने पैसों से पूरा कर दिया। मुआवजे के पैसों से प्लाट लिया अब उसकी रजिस्ट्री करवानी है तो भैय्या को बताया था पैसो की जरूरत है तो वो आज इसीलिए आए है। ये सुनकर दिल भर आया। किसी के लिए बिना किसी राजनीति के सेवा करना और अंत तक उससे जुड़े रहना बड़ी बात है। जब एक्सीडेंट हुआ था तो पूरा शहर उस पर राजनीति कर रहा था, लेकिन सही मायने में यदि उन बेसहारों का सहारा तो तरुण बाहेती बने।
श्री बाहेती ने और हमने उन बच्चों के साथ जाकर प्लाट देखा और आगे की कार्यवाही करवा के पुनः लौट आए। रास्ते में जब तरुण भाई से पूछा कि आप इनसे इस तरह जुड़े रहे और इसका किसी को पता नही है। वो बोले शायद इन्ही बच्चों की दुआएं थी कि मेरा एक्सीडेंट हुआ था तो मैं बच गया।
इस तरह के और भी कई अनकही अनजानी सेवा में लगे है तरुण भाई।

ऐसे सेवाभावी, निष्कलंक, नेता यदि हमारे देश के हो जाए तो सारा परिदृश्य ही बदल जाएगा। एक सेल्यूट तो बनता है मानवता के पुजारी तरूण बाहेती के लिए।
जय हिंद, जय भारत।