सीपीएस पद्धति अफीम काश्तकारों के लिए बनी जी का जंजाल सिंगोली क्षेत्र में चोरों का भय किसान कर रहे हैं रात्रि जागरण

*सीपीएस पद्धति अफीम काश्तकारों के लिए बनी जी का जंजाल*

*सिंगोली क्षैत्र मे चोरो का भय, किसान कर रहे है रात्रि जागरण।*

सिंगोली। क्षेत्र में सीपीएस पद्धति के तहत अफीम की खेती करने वाले किसानों को अफीम चोरी का भय सताने लगा है। वे मजदूरों के साथ रात रात भर जागकर फसल की निगरानी कर रहे है।
फसल सुखने के बाद कब इसका निरीक्षण होगा और कब डोडा तुड़वाने का आदेश जारी होगा?कुछ भी स्पष्ट नहीं है। जब तक नारकोटिक्स विभाग खेत से डोडे नहीं तुड़वा लेता, तब तक किसानों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
ग्राम ताल में बीती रात एक ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला जब कृषक शंभुलाल बंजारा को मजदूरों के साथ अफीम काश्त की निगरानी करते देखा गया।
अफीम काश्तकार शंभुलाल ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि क्षेत्र में इन दिनों चोर आने लगे है। फसल चोरी के भय के कारण वह कई दिनों से चार पांच मजदूरों के साथ रात रात भर फसल की निगरानी कर रहा है। वह चाहता है कि नारकोटिक्स विभाग जल्द से जल्द डोडो को तुड़वाने की कार्रवाई शुरू करें ताकि उन्हें परेशानी से निजात मिले।
दर असल सीपीएस पद्धति में अफीम डोडो को खेत में ही सुखाने का प्रावधान किया गया है। फसल सुखने के बाद नारकोटिक्स विभाग द्वारा फसल का निरीक्षण किया जाएगा।
जब विभाग को यह संतुष्टि होगी कि फसल पूर्णतः सुरक्षित है। तब वह डोडे तुड़वाने की कार्रवाई शुरू करेगा। हालांकि किसानों ने सीपीएस पद्धति से अफीम काश्तकारी को बहुत ही जटील बताया है। अब यदि जल्दी किसान को राहत नहीं मिली तो हो सकता है ? भविष्य में वह सीपीएस पद्धति से अफीम खेती करने से ही इंकार कर दे?